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Monday, March 21, 2011

मनरेगा की असलियत

Monday, March 21, 2011
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उत्तराखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना चार साल बाद भी घिसट-घिसट कर ही चल रही है। कहां तो अभी तक राज्य के सभी गांवों को इससे आच्छादित हो जाना चाहिए था, लेकिन हश्र यह है कि अभी भी 523 ग्राम पंचायतों में मनरेगा का कोई नामलेवा नहीं मिल रहा।
परिदृश्य पर नजर दौड़ाएं तो शुरू से ही मनरेगा सरकारी सुस्ती से बाहर नहीं निकल पाई है। हालांकि, शुरुआती दौर में गांव के व्यक्ति को सौ दिन का रोजगार देने वाली इस योजना ने अच्छे संकेत दिए, लेकिन सही रीति-नीति के अभाव में यह परवान नहीं चढ़ पा रही। असल में योजना में लाभार्थियों को लाभ पहंुचाने के मद्देनजर जटिलताएं भी कम नहीं हैं।
जॉब कार्ड बनाने की जटिलता, कम दिहाड़ी, कई बार समय से मजदूरी का भुगतान न होने जैसे कारणों से भी इसमें अरुचि बढ़ रही है। फिर सरकारी महकमों ने भी ऐसी कोई रणनीति अब तक नहीं दिखाई है, जिससे वह मनरेगा से संबंधित ग्रामीणों की शिकायतों को दूर कर उन्हें कार्य करने को प्रेरित कर सके।
शासन-प्रशासन इसके लिए स्टाफ की कमी का रोना रोता है, लेकिन इसके लिए व्यवस्था तो सरकार को ही करनी है। यही नहीं, कई जगह मनरेगा में भी भ्रष्टाचार की शिकायतें आती रही हैं। कभी फर्जी जॉबकार्ड तो कभी फर्जी मस्टररोल भरने जैसी शिकायतें इनमें मुख्य हैं। इन सब कारणों के चलते मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण और गांव के आखिरी व्यक्ति तक कुछ राहत पहंुचाने वाली इस योजना को पलीता लग रहा है। टिहरी जैसे जिले की 408 ग्राम पंचायतों में जॉबकार्ड न बनना तो यही प्रदर्शित कर रहा है।
हालांकि, अक्सर यह दावा किया जाता है कि मनरेगा के क्रियान्वयन पर गंभीरता से ध्यान दिया जा रहा है, फिर भी स्थिति नाजुक है। साफ है कि इसके लिए ज्यादा जिम्मेदार सरकारी तंत्र ही है।
Source : courtsy jagran.com

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र्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के राज्य विधानसभा में प्रतिपक्ष की नेता चुने जाने के बाद जहां एक ओर भाजपा में गुटबाजी ने जोर पकडना प्रारम्भ हो गया हैं वही सत्तारूढ पार्टी एवम् आम आदमी की सरकार में अजीब सी हलचल होने लगी है। भाजपा में गुटबाजी विधानसभा चुनाव के बाद से ही दिखाई देने लगी थी जब भाजपा के एक गुट ने वसुन्धरा राजे के नेता प्रतिपक्ष पद से हटाने की मुहिम छेडी थी परिणामस्वरूप भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने वसुन्धरा राजे को नेता प्रतिपक्ष के पद से त्याग पत्र देने को कहा था । लम्बी खींचतान के बाद वसुन्धरा ने त्याग पत्र दिया समझौता स्वरूप राष्ट्रीय महासचिव के पद का स्वीकारा । तब से वसुन्धरा राजे समर्थक विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष किसी ओर को नहीं बनने दिया । राज्य की प्रमुख विपक्ष उपनेता के सहारे विधान सभा में विपक्ष की भूमिका अदा करती रही।
वसुन्धरा राजे के पुनः प्रतिपक्ष नेता चुने जाने के बाद विधान सभा के बजट सत्र विपक्ष ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश की। बजट को लेकर प्रतिपक्ष ने नेता वसुन्धरा राजे ने बजट को कमजोर सरकार का कमजोर बजट करार दिया तथा राज्य सरकार को सुझाव दिया कि डीजल घ्ेट्रोल पर वेट घटाना चाहिये। केन्द्र किसानों के लिए आधा अनुदान भुगतने को तैयार है तो भी डीजल सस्ता न करने तर्क समझ नहीं आता। बजट में न कोई सोच है और न ही विजन जबकि देश दुनिया की बदलती स्थितियों मे यह वक्त बडे निर्णय लेने का है। राजकोषीय घाटा बढ रहा हैं । राज्य सरकार केन्द्रीय योजनाओं में मिलने वाला धन का खर्च करने में असफल रहा है। प्रतिपक्ष नेता के सवालों का उत्तर देते हुए राज्य के वित्त मंत्री एवम् मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कई घोषणाएं कर डाली। जिसके तहत महानरेगा सहायकों का मानदेय 3000 से बढा कर 3510 रूपयें, ग्राम रोजगार सहायक का 3500 से 4000, डाटा एन्ट्री ऑपरेटर का 4000 से 5330 रूपये करने, जयपुर में नया पर्यटन भवन बनाने विधायकों के लिए जयपुर में अगले साल में 50 बहुमंजिलें फ्लैट्स व माही परियोजना का बांसवाडा में रेस्ट एवं सfकZट हाउस बनाने, जिला प्रमुखों को 1 1 अतिवहन उपलब्ध करवाने के अलावा कई वस्तुओं में कर राहत देने की घोषणा सदन में की।

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Wednesday, February 23, 2011

Wednesday, February 23, 2011
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जयपुर। नियमित करने सहित आठ सूत्री मांगों को लेकर बुधवार को राजस्थान महात्मा गांधी नरेगा संविदाकार्मिक संघ के बैनर तले नरेगा संविदाकर्मियों ने बाइस गोदाम से विधानसभा तक रैली निकाली और पंचायतीराज मंत्री भरत सिंह और आयुक्त नरेगा को ज्ञापन सौंपा।

इससे पहले सभा को संबोघित करते हुए संघ के प्रदेशाध्यक्ष अशोक कुमार वैष्णव ने कहा कि 2 फरवरी 2011 के नरेगा संविदाकर्मियों के सर्कुलर को सरकार तुरंत प्रभाव से निरस्त कर 9 जनवरी 2007 के सर्कुलर का नवीनीकरण करे। उन्होंने सरकार से नरेगा संविदाकर्मियों को नियमित करने व वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग की और कहा कि जब तक मांगे नहीं मानी जाएंगी आंदोलन जारी रहेगा। उधर, सरपंच एसोसिएशन के प्रदेश संयोजक पहाड सिंह ने घोष्ाणा की है यदि नरेगा संविदाकर्मियों की मांगों पर 28 फरवरी तक सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं किया तो सरपंच और ग्राम सेवक भी कार्यो का बहिष्कार करेंगे।

लग गया जाम

रैली के दौरान सहकार मार्ग पर जाम लग गया। बाईस गोदाम से लक्ष्मी मंदिर जाने वाले वाहनों को अम्बेडकर सर्किल की तरफ डायवर्ट किया गया। रामबाग से बाईस गोदाम जाने वाले वाहनों को अम्बेडकर सर्किल से स्टेच्यू की तरफ डायवर्ट किया गया।

अनुबन्ध प्रारूप स्थगित

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री भरतसिंह ने महानरेगा संविदा कर्मियों को आश्वासन दिया है कि 2 फरवरी, 2011 के अनुबंध प्रारूप को स्थगित करने के साथ ही 9 जनवरी, 2007 के अनुबंध प्रारूप में शामिल बिन्दुओं का परीक्षण करवाया जाएगा। सरकार ने इस सम्बंध में बुधवार को आदेश जारी कर दिए। महानरेगा आयुक्त तन्मय कुमार ने बुधवार को सभी जिला कलक्टर एवं जिला कार्यक्रम समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि वे 28 फरवरी, 2011 के बाद किए जाने वाले संविदा अनुबंध प्रपत्र 2 फरवरी 2011 पर कार्यवाही स्थगित रखें।


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Wednesday, February 16, 2011

Wednesday, February 16, 2011
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नरेगा कर्मियों की हड़ताल शुरू

Source: भास्कर न्यूज & निवा� | Last Updated 01:20(15/02/11)

महात्मा गांधी नरेगा कर्मचारी संगठन ने दो दिन की कलमबंद हड़ताल सोमवार से शुरू कर दी है। नरेगा कार्मिकों ने बताया कि ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग द्वारा हाल ही कार्मिकों के संबंध में अनुबंध का नवीन प्रारूप लागू किया है, जिसमें कार्मिकों के हितों का ध्यान नहीं रखा गया है। इसके अलावा सात सूत्रीय मांगों को लेकर नरेगाकार्मिकों ने दो दिन के लिए कलमबंद हड़ताल शुरू कर प्रदर्शन किया व एसडीएम तथा विकास अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। नरेगा कार्मिकों द्वारा मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को सौंपे ज्ञापन में सात सूत्रीय मांगे शामिल है।

इनमें नरेगा कार्मिकों को नियमानुसार स्थायी करने, छठे वेतन आयोग का लाभ देने, ग्राम रोजगार सहायकों के निरस्त किए स्थायी पदों को बहाल करते हुए शेष समस्त संविदा कार्मिकों के स्थायी पदों का सृजन करने व वर्तमान में कार्यरत कार्मिकों की स्थायी नियुक्ति करने, पांच दिवसीय सप्ताह करने, संविदा कार्मिकों को सवेतनिक अवकाश स्वीकृत करने, संविदा सेवा शर्तों के अनुरूप पीएफ की कटौती करने व मेडिकल एवं दुर्घटना बीमा की व्यवस्था करने की मंागें शामिल है। ज्ञापन देने वालों में मोतीलाल, रघुवीर, लालाराम, शिवचरण, ताराचंद, रामअवतार सहित सभी नरेगा कार्मिक उपस्थित थे।

टोंक & महात्मा गांधी नरेगा कर्मचारी संगठन ने मांगों के समर्थन में सोमवार से दो दिन की कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी। कर्मचारियों ने एसडीएम को दिए गए ज्ञापन में बताया कि सभी कार्मिक नरेगा योजनांतर्गत संविदा पर कार्यरत है।

ग्रामीण विकास एवं पंयायतीराज विभाग द्वारा संविदा पर कार्यरत कार्मिकों के संबंध में अनुबंध का नवीन प्रारुप लागू किया गया है। इस संबंध में सभी नरेगा कर्मचारी १४ फरवरी से दो दिन की कलमबंद हड़ताल पर है। राज्य सरकार ने संविदा कार्मिकों को मांगें नहीं मानी तो १७ फरवरी से अनिश्चितकालीन कमलबंद हड़ताल करेंगे।

टोडारायसिंह. टोडारायसिंह के नरेगा योजनान्तर्गत संविदा पर कार्यरत कार्मिकों ने लागू किए गए नवीन प्रारुप में हितों का ध्यान नहीं रखने पर मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी गोपालराम बिरदा को सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है। साथ हीं दो दिन का कलमबंद आंदोलन का आह्वान

किया है।

नरेगा कार्मिकों ने ज्ञापन से मुख्यमंत्री को अवगत करवाया है कि वे नरेगा में संविदा पर कार्यरत है। ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग द्वारा अनुबंद का नया प्रारुप लागू किया गया है। उसमें नरेगा कार्मिकों के हितों का ध्यान नहीं रखा गया है। इसलिए उन्होंने दो दिन का कलमबंद आंदोलन किया है। फिर भी उनकी मांगें नहीं मानी गई तो 17 फरवरी से अनिश्चितकालीन कलमबंद आंदोलन किया जाएगा।

ये हंै नरेगा कार्मिकों की मांगें

नरेगा कार्मिकों को नियमानुसार स्थायी किया जाए, छठे वेतन आयोग अनुसार वेतन लाभ दिया

जाए, ग्राम रोजगार सहायकों के निरस्त किए स्थायी पदों को बहाल करते हुए शेष समस्त संविदा कार्मिकों के स्थायी पदों का सृजन किया जाकर वर्तमान में कार्यरत कार्मिकों की हीं स्थायी नियुक्ति की जाए, छह दिवसीय सप्ताह के स्थान पर पांच दिवसीय सप्ताह किया जाए,

स्थायी कार्मिकों की तरह संविदा कार्मिकों को भी सवैतनिक अवकाश की स्वीकृति दी जाए, 9 जनवरी, 2007 की संविदा सेवा शर्तों के

अनुसार पीएफ कटौती की जाए, मेडिकल एवं दुर्घटना बीमा की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा

की जाए।


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नरेगा कार्मिक रखेंगे पेन डाउन हड़ताल..

Source: भास्कर न्यूज | Last Updated 01:10(14/02/11)
कुचामन सिटी & मनरेगा कार्मिक संघ प्रदेश कार्यकारिणी के आह्वान पर नागौर जिले के सभी नरेगा कार्मिक सोमवार को पेन डाउन हड़ताल रखेंगे। संघ के जिला अध्यक्ष रूपाराम नेहरा ने बताया कि राज्य सरकार की नीति व रवैया नरेगा कार्मिकों के प्रति सकारात्मक नहीं है। सरकार उनके प्रति सहयोगात्मक रूख अख्तियार नहीं करेगी सभी कार्मिक हड़ताल पर रहेंगे। पेनडाउन हड़ताल के साथ समस्त कार्यो को बहिष्कार करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में खण्ड स्तर पर एसडीएम को ज्ञापन दिया जाएगा।

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नरेगा संविदा कार्मिकों ने की नए अनुबंध की निंदा

Source: राजसमंद | Last Updated 01:25(17/02/11)

महात्मा गांधी नरेगा कार्मिक संघर्ष समिति की बैठक बुधवार को जिला कलेक्ट्री परिसर में हुई। बैठक में सहायक रोजगार, कम्प्यूटर ऑपरेटर, डाटा ऐंट्री ऑपरेटर, लेखा सहायक, एमआईएस, जेटीओ आदि ने भाग लिया। सभी कार्मिकों ने सरकार द्वारा किए गए नवीन अनुबंध प्रारूप की निंदा की। संविदा कार्मिकों ने उनको नियमित करने एवं छठा वेतनमान देने की मांग की। जिला स्तरीय ग्राम पंचायत एवं तहसील स्तर पर आगामी बैठक 22 फरवरी को सुबह 10 बजे जिला कलेक्ट्री परिसर जेके गार्डन में आयोजित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में दामोदर मीणा, अंबालाल कुमावत, किशनसिंह, शंकरलाल जीनगर, पुष्पेंद्र कुमार खटीक, सागरमल खटीक, जिला अध्यक्ष कमलेेंद्र आदि मौजूद थे।

नरेगा संविदाकर्मियों ने दी धरने की चेतावनी

आमेट & महानरेगा में संविदाकर्मियों के नए अनुबंध में सरकार द्वारा जारी शर्तों के विरोध में महानरेगा संविदाकर्मियों ने तहसीलदार शिवप्रकाश सोनी को गत दिवस दिए ज्ञापन में 21 फरवरी तक मांग पूरी नहीं होने पर धरने की चेतावनी दी है। नारायणलाल, चंद्रसिंह, राधेश्याम, रोशनलाल, गुडिय़ा चौहान, अभिषेक शर्मा, किशनसिंह ने ज्ञापन में बताया कि संविदाकर्मियों को स्थायी करने, छठे वेतन का लाभ देने, निरस्त किए स्थायी पदों को बहाल करने, पांच दिवसीय सप्ताह करने, संविदा शर्तानुसार पीएफ कटौती, मेडिकल एवं बीमा


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नियमित करने की मांग, नरेगा कार्मिकों ने किया प्रदर्शन

Source:पाली | Last Updated 01:17(19/01/11)
नियमित करने समेत अन्य मांगों को लेकर मंगलवार को नरेगा में लगे रोजगार सहायकों एवं अन्य कार्मिकों ने कलेक्ट्रेट के सामने धरना देकर प्रदर्शन किया। उन्होंने कलेक्ट्रेट से गांधी मूर्ति तक रैली भी निकाली और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर नीरज के पवन को ज्ञापन सौंंपा। राजस्थान रोजगार सहायक संघ एवं एमजी नरेगा कार्मिक संघ के तत्वावधान आयोजित धरने में सुबह से ही जिले भर के कार्मिक पहुंचने शुरू हो गए थे, उन्होंने कलेक्टर के समक्ष धरना दिया। उसके बाद धरना स्थल से गांधी मूर्ति तक रैली निकाली, रैली में शामिल कार्मिक हाथों में तख्तियां लिए हुए थे। गांधी मूर्ति से रैली वापस कलेक्ट्रेट पहुंची। यहां उन्होंने कुछ देर के लिए नारेबाजी की और कलेक्टर को अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि नरेगा कार्मिक पिछले तीन साल से नरेगा योजना को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दे रहे हैं। ग्राम पंचायतों में लगे रोजगार सहायक कम मानदेय में भी कार्य कर है। शेष & पेज १५

नरेगा में लगे कार्मिकों का वेतन बढ़ाने एवं नियमित करने की मांग को लेकर कई बार सरकार को अवगत करवाया गया है, लेकिन अभी तक उनकी मांगों को पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने ज्ञापन में बताया है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाने पर वे नरेगा के कार्य को छोड़कर हड़ताल करेंगे। इस बीच जिला प्रमुख खुशवीरसिंह ने भी उनकी मांगें मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस दौरान रोजगार सहायक संघ के जिलाध्यक्ष चेतन चौहान, जसाराम पूनिया, असलम मुगल, जोगसिंह, मदनलाल व दूदाराम समेत कई रोजगार सहायक व नरेगा में संविदा पर लगे कई कार्मिक उपस्थित थे।

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सड़कों पर उतरे नरेगा कार्मिक आज से पेन डाउन हड़ताल
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श्रीगंगानगर & नरेगा कार्मिकों ने एक वर्ष के अनुबंध करके केवल दो माह बाद ही कंप्यूटर आपरेटर के पद से हटाने के राज्य सरकार के आदेश के विरुद्ध आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। मंगलवार को पार्षद रमजान अली चोपदार के नेतृत्व में महानरेगा कंप्यूटर ऑपरेटर संघ के सदस्यों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम एडीएम और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में जिले के अन्य पंचायत समिति क्षेत्रों से आए नरेगा कार्मिकों ने भाग लिया।

संघ के सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार ने कंप्यूटर ऑपरेटर और डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्ति के मात्र दो माह बाद ही उन्हें २८ फरवरी को नौकरी से हटाने के आदेश जारी किए हैं, जो उनके साथ विश्वासघात है। अनुबंध पर नियुक्त कार्मिकों में बड़ी संख्या में ऐसे युवक-युवतियां हैं, जो सरकारी नौकरी पाने की चाह में निजी कंपनियों की १५ हजार रुपए तक की मासिक वेतन की सर्विस छोड़ कर आए थे।

ज्ञापन में कहा गया है कि नरेगा अधिनियम के अनुसार इस योजना में कोई कार्य ठेके पर नहीं करवाया जा सकता, फिर कार्मिकों की नियुक्तियां निजी कंपनियों के माध्यम से ठेके पर क्यों की जा रही हैं। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि सरकार ने अपना आदेश तुरंत प्रभाव से वापिस नहीं लिया तो वे १७ फरवरी से पेन डाउन हड़ताल करेंगे और १८ से कलेक्ट्रेट के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना आरंभ कर देंगे।


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संविदा नरेगा कार्मिक उतरे आंदोलन पर

Source: डूंगरपुर | Last Updated 01:19(17/02/11)

संविदा नरेगा कार्मिकों ने विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को बैठक की और गुरुवार से आंदोलन करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत गुरुवार से काली पट्टी बांधकर विरोध करेंगे। 21 फरवरी को महारैली निकालकर कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन की सहमति बनी। इसके बाद शहर में रैली निकाली और मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

पंचायत समिति के सामने स्थित नेहरु पार्क में आयोजित संविदा नरेगा कार्मिको की बैठक में जेटीए, लेखा सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर, सहायक सचिव, जिला कॉर्डिनेटर, एमआईएस मैनेजर शामिल हुए। इसमें कई मुद्दो पर चर्चा करते हुए आंदोलन करने के निर्णय लिए गए। यहां से रैली के रूप नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां कलेक्टर पूर्णचंद्र किशन को विभिन्न मांगों से अवगत कराते हुए समाधान की गुहार लगाई। संघ जिलाध्यक्ष कांतिलाल कटारा के नेतृत्व में कार्मिको ने बताया कि भारत सरकार द्वारा जारी निर्देश नरेगा योजनांतर्गत कोई भी स्थाई पद सृजित नहीं करने के आदेशों का विरोध जताया और कार्यरत संविदा कार्मिको को नियमित समायोजित करने, संविदा कार्मिको को संविदा अनुबंध वित्त विभाग के परिपत्र के अनुसार भरवाने तथा वार्षिक मूल्याकंन के आधार पर नवीनीकरण करने, संविदा कार्मिको का मानदेय राज्य सिविल सेवा नियम 2008 की अनुसूचि अनुसार नियमित कर्मचारी को प्रोबेशन ट्रेनी के रुप में देय मानदेय के आधार पर तय करने सहित कई मांगे रखी। इस पर कलेक्टर ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

कार्मिको में हुआ टकराव : कलेक्टर से वार्ता के पश्चात संविदा नरेगा कार्मिकों में आपसी सहमति नहीं होने के कारण टकराव हो गया। कुछ कार्मिको का कहना था कि गुरुवार से हड़ताल शुरू कर देनी चाहिए, जिस पर एक पक्ष ने प्रशासन के वार्ता के बाद कुछ दिनों का समय देने की बात कही। इस बात पर दोनों पक्षों में काफी कहासुनी हुई और टकराव की स्थिति पैदा हो गई। लंबे समय तक चर्चा के बाद गुरुवार से काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करने की सहमति बनी।

संघ का नाम बदला, कार्यकारिणी गठित

संविदा नरेगा कार्मिक संघ ने अपनी कार्यकारिणी के नाम को बदलकर अखिल राजस्थान नरेगा कार्मिक संघ रखने का निर्णय लिया। इसके पश्चात कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें कांतिलाल कटारा को पुन: जिलाध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा देवीलाल डामोर, अनिल पंड्या को सरंक्षक, मोहनलाल रोत को सह अध्यक्ष, सूर्यप्रकाश चौबीसा, कीर्ति वैष्णव को उपाध्यक्ष, प्रवीणसिंह राव, भूपेंद्रसिंह चौहान, पुष्पेंद्र जैन, जीवराम ननोमा, रणजीतसिंह सांखला, श्यामसुंदर पानेरी को महामंत्री, अमजद शेख, भूपेंद्रसिंह चौहान को कोषाध्यक्ष, महेश जोशी को जिला प्रवक्ता, जयसिंह डामोर, मोहनलाल भगोरा, संतोषसिंह, सुरजमल कटारा को जिला संगठन मंत्री नियुक्त किया गया है।


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Tuesday, February 15, 2011

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Monday, February 14, 2011

नरेगाकर्मी कल से करेंगे कार्य बहिष्कार

Monday, February 14, 2011
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मूण्डवा। महात्मा गांधी नरेगा कार्मिक संघ के आह्वान पर अनुबंध पर काम कर रहे कर्मचारी सात सूत्री मांगों के समर्थन में सोमवार से कार्य का बहिष्कार करेंगे। समस्त महानरेगा कार्मिक संघ के कोषाध्यक्ष अमीन मोहम्मद ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से दो फरवरी को जारी किए गए आदेश के विरोध में पंचायत समिति में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर, लेखा सहायक, जेटीए तथा रोजगार सहायक मांगें नहीं माने जाने तक कार्य का बहिष्कार करेंगे।

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नरेगा शिकायत समाधान हेतु प्रत्येक माह नरेगा संवाद

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नरेगा शिकायत समाधान हेतु प्रत्येक माह नरेगा संवाद

उदयपुर / जिले में संचालित की जा रही महात्मागांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से संबंधित शिकायतों के त्वरित समाधान हेतु माह के प्रत्येक द्वितीय शुक्रवार को ‘नरेगा संवाद कार्यक्रम’ आयोजित किया जाएगा।
जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं जिला कलक्टर ने बताया कि माह के प्रत्येक शुक्रवार को मध्यान्ह 3 बजे जिला परिषद् सभागार में नरेगा संवाद कार्यक्रम होगा। इसमें जिला, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधि एवं शिकायतकर्ताओं की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि फरवरी माह का संवाद कार्यक्रम 11 फरवरी को मध्यान्ह 3 बजे आयोजित होगा।


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नरेगा: मजदूरी बढऩे से श्रमिक काम पर आए

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नरेगा: मजदूरी बढऩे से श्रमिक काम पर आए


जयपुर। महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी बढऩे के बाद काम पर आने वाले मजदूर की संख्या बढऩे लगी है।
अब नरेगा श्रमिकों को 100 के बजाए 119 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी मिलेगी। इस तरह उनकी सालाना आय में 1900 रुपए की बढ़ोतरी हो जाएगी।



केंद्र सरकार ग्रामीण मजदूरों को वर्ष में कम से कम सौ दिन रोजगार उपलब्ध कराने के लिए रोजगार गारंटी योजना चला रहा है। वर्ष 2005 से शुरू हुई योजना में बढ़ती महंगाई के हिसाब से मजदूरी दर भी बढ़ाए जा रहे है। श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में जनवरी के अंतिम सप्ताह में भी बढ़ोतरी की गई है।



मनरेगा के अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक आरसी गुप्ता कि नरेगा में काम पर पहले करीब 10 हजार श्रमिक आ रहे थे, लेकिन अब श्रमिकों की संख्या 33 हजार तक पहुंच गई है। न्यूनतम मजदूरी बढऩे से भी प्रभाव पड़ा है।

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Sunday, January 30, 2011

महानरेगा श्रमिकों को मिलेगा एरियर!

Sunday, January 30, 2011
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महानरेगा श्रमिकों को मिलेगा एरियर!
NREGA, MGNREGA, MG NREGA

बांसवाड़ा। अकुशल श्रमिकों को एरियर। सुनने में अजीब लगे, लेकिन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत नियोजित श्रमिकों के लिए यह खुशखबर जैसा ही है। न्यूनतम मजदूरी बढ़ने के बाद एक जनवरी से किसी श्रमिक को एक सौ रूपए का भुगतान होने पर शेष राशि बतौर एरियर दिए जाने के आदेश हुए हैं। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से एक जनवरी से महानरेगा के तहत अकुशल शारीरिक श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी प्रति दिवस 119 रूपए कर दी गई है।

ऎसे में योजना के तहत स्वीकृत कार्य पर नियोजित श्रमिक को एक जनवरी से टास्क के आधार पर 119 रूपए भुगतान कराने के लिए कार्यकारी एजेंसियों को पाबंद किया गया है। महानरेगा आयुक्त तन्मय कुमार की ओर से 25 जनवरी को जारी आदेशानुसार एक जनवरी के बाद की अवधि का भुगतान यदि श्रमिक को एक सौ रूपए किया गया है, तो शेष उक्त अवधि के लिए श्रमिक को एरियर का भुगतान भी किया जाएगा। इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला कार्यक्रम समन्वयकों को पाबंद किया गया है।

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कानून एक, मजदूरी अलग

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कानून एक, मजदूरी अलग
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भीलवाड़ा। संसद ने कानून बना समान रूप से पूरे देश में लागू किया, लेकिन मजदूरी के पैमाने अलग-अलग हो गए। किसी श्रमिक को प्रतिदिन 117 रूपए तो किसी को 179 रूपए तक मिल रहे हैं।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम-2005 (नरेगा) के तहत अकुशल शारीरिक कामगार (श्रमिक) को मिलने वाली मजदूरी राशि में 1 जनवरी से संशोधन हुआ। संशोधन की अधिसूचना केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 14 जनवरी को भारत सरकार के गजट में जारी कर दी। इस अधिसूचना के बाद राजस्थान में नरेगा मजदूरी राशि 100 रूपए से बढ़कर 119 रूपए भले हो गई, लेकिन हरियाणा में 179 रूपए या चण्डीगढ़ में 174 रूपए की तुलना में काफी कम है। राजस्थान उन राज्यों में शामिल हैं, जहां नरेगा श्रमिकों की मजदूरी राशि अन्य राज्यों की तुलना में कम है। हिमाचल प्रदेश में गैर अनुसूचित क्षेत्र में 120 रूपए तो अनुसूचित क्षेत्र में 150 रूपए मजदूरी है।

क्या है कारण
नरेगा में मजदूरी राशि अलग-अलग होने का एक कारण राज्यों में न्यूनतम मजदूरी राशि अलग-अलग होना है। राजस्थान में हाल ही मजदूरी 100 से बढ़ाकर 135 रूपए किया गया था, जबकि केरल, हरियाणा जैसे राज्यों में यह राशि 180 से 200 रूपए तक है।

राज्यों में नरेगा में अधिकतम मजदूरी राशि
राज्य राशि
असम 130
आन्ध्रप्रदेश 121
बिहार 120
गुजरात 124
हरियाणा 179
राजस्थान 119
जम्मू-कश्मीर 121
कर्नाटक 125
केरल 150
मध्यप्रदेश 122
महाराष्ट्र 127
मणिपुर 126
मेघालय 117
मिजोरम 129
नगालैण्ड 118
उड़ीसा 125
पंजाब 124
सिक्कम 118
तमिलनाडु 119
उत्तर प्रदेश 120
पश्चिम बंगाल 130
छत्तीसगढ़ 122
झारखण्ड 120
गोवा 138
चण्डीगढ़ 174
लक्षद्वीप 138


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नरेगा के 2009-10 के राष्ट्रीय पुरस्कार घोषित

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नरेगा के 2009-10 के राष्ट्रीय पुरस्कार घोषित
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बांसवाड़ा | महात्मा गांधी नरेगा के वर्ष 2009-10 के राष्ट्रीय पुरस्कार घोषित कर दिए गए हैं। ग्राम पंचायत श्रेणी में देश की श्रेष्ठ 11 पंचायतों में राजस्थान से दो पंचायतों का चयन हुआ है। इनमें बांसवाड़ा के कुशलगढ़ पंचायत समिति की बड़वास छोटी ग्राम पंचायत और भीलवाड़ा जिले से आसीन्द पंचायत समिति का रामपुरा शामिल है। जिला स्तर पर दस विभिन्न श्रेणियों में घोषित राष्ट्रीय पुरस्कारों में राजस्थान से बाड़मेर का चयन टीम लीडरशिप के लिए हुआ है। वहां के जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं कलक्टर गौरव गोयल का नाम इस पुरस्कार के लिए चयनित हुआ है।

केन्द्रीय ग्रामीण विकास विभाग की संयुक्त सचिव अमिता शर्मा ने 27 जनवरी को इन पुरस्कारों की घोषणा की, जबकि पुरस्कार 2 फरवरी को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले समारोह में दिए जाएंगे। जिला स्तरीय पुरस्कार जिला कलक्टर एवं पंचायत स्तर का पुरस्कार सरपंचों को दिए जाएंगे।




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नरेगा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

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नई दिल्ली : सरकार की महत्वपूर्ण योजना मनरेगा में भागीदारी के मामले में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है। इस कार्यक्रम में महिलाओं की औसत हिस्सेदारी राष्ट्रीय स्तर पर 52 फीसदी है, लेकिन कई राज्यों में यह 70 फीसदी से ऊपर है। मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली छमाही तक केरल में 90 फीसदी महिलाओं की उत्कृष्ट भागीदारी दिखी, वहीं तमिलनाडु व पॉन्डिचेरी जैसे राज्यों में भी यह दर लगभग 80 फीसदी रही। राजस्थान व गोवा आदि में यह प्रतिशत करीब 70 रहा। यूपी में यह 20 फीसदी से नीची रही, वहीं बिहार, प.बंगाल में महिलाओं की सक्रियता महज 20-30 फीसदी नजर आई। नरेगा की शुरुआत गरीब (बीपीएल) ग्रामीणों के लिए रोजगार सुनिश्चित करने के लिए हुई हो, लेकिन यह उनके लिए अतिरिक्त आय के साधन भी बन गया है।

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नरेगा कार्यों में कोताही बरतने पर सचिव को एपीओ करने के आदेश

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विकास कार्य नही करवाए जाने पर ग्राम पंचायत निमेड़ा सचिव को निलंबित कर अन्य योग सचिव जिला परिषद सदस्य बासंती मीणा द्वारा लगाने की मांग पर अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने सचिव को एपीओ करने के विकास अधिकारी पंंचायत समिति टोंक को आदेश दिए।


जिला परिषद सदस्य बासंती देवी ने जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र देकर अवगत कराया था कि उनके वार्ड 25 क्षेत्र की ग्राम पंचायत निमेडा में नरेगा, राच्य वित्त आयोग, 12वां वित्त आयोग, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि योजना के स्वीकृत कार्य सचिव द्वारा नही कराए जा रहे है, जिससे स्वीकृतियां निरस्त होने की स्थिति में विकास कार्य नही होने से जनता के सामने जवाब देना मुश्किल हो रहा। इसलिए ग्राम पंचायत निमेड़ा सचिव बलवीर सिंह को तुरंत निलंबित कर अन्य योग्य सचिव को लगाया जाए, ताकि पंचायत में विकास कार्य हो सके। जिस पर अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी इकबाल हुसैन ने कार्यवाही करते हुए बीडीओ टोंक को निमेडा सचिव को एपीओ करने के निर्देश दिए।

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Saturday, January 22, 2011

छिने अधिकार लेने में ही रह गए सरपंच!

Saturday, January 22, 2011
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छिने अधिकार लेने में ही रह गए सरपंच!

अजमेर. पंचायतीराज संस्थाओं में 5 साल के लिए निर्वाचित हुए सरपंचों के कार्यकाल का एक साल बीत गया और अधिकार की लड़ाई में विकास के नाम पर वे कुछ नहीं कर पाए। पूरे साल सरपंच टेंडरों और छीने गए अधिकारों को वापस लेने में ही उलझकर रह गए। गांवों की सरकारें गंदे पानी की निकासी के लिए नालियां बनाने में भी नाकामयाब रहीं।

महानरेगा में लाखों की लागत से आईटी सेंटर स्वीकृ किए गए लेकिन एक का भी निर्माण पूरा नहीं हो पाया। गांवों की सरकारें पहले अपने स्तर पर ही टेंडर कर गांव का चहुंमुखी विकास कराती थीं। टेंडर करने का यह सिलसिला लंबे समय से ही चला आ रहा था। ग्राम पंचायत की योजनाओं के साथ-साथ महानरेगा के टेंडर भी सरपंच व ग्रामसेवक ही किया करते थे। ग्राम स्तर पर टेंडर करने से गांव के ठेकेदारों को भी रोजगार मिलता था। इधर, सरकार ने महानरेगा में भ्रष्टाचार की आड़ लेते हुए ग्राम पंचायतों से महानरेगा के टेंडर तो ग्राम पंचायतों से छीने ही, पंचायत की योजनाओं के लिए किए जाने वाले टेंडर भी छीनकर पंचायत समिति को दे दिए।

पंचायत समिति ने लंबी मशक्कत के बाद अपने स्तर पर ही टेंडर किए तो अलग-अलग सामग्री के अलग-अलग ठेकेदार हो जाने के कारण सामग्री ही समय पर सप्लाई नहीं कर पाए। आईटी सेंटर पर ठेकेदारों द्वारा घटिया सामग्री सप्लाई करने की भी सरपंचों ने शिकायतें ही लेकिन प्रशासन ने जांच करवाना मुनासिब ही नहीं समझा। सरपंचों ने अपने अधिकारी छीनने का जमकर विरोध किया, नतीजतन सरकार को झुकना पड़ा और 2 अक्टूबर को ग्राम पंचायतों को ही टेंडर करने के लिए स्वतंत्र कर दिया। लेकिन राज्य सरकार की विरोधाभासी व्यवस्था के कारण ग्राम पंचायतों द्वारा टेंडर करने के बाद भी वे अमल में नहीं आ पाए।

इसके पीछे वजह यह रही कि पंचायत समिति स्तर पर किए गए टेंडरों को निरस्त ही नहीं किया गया और ना ही ठेकेदारों को उनकी जमा राशि ही लौटाई। ऐसे में वर्तमान में दो-दो स्तर पर टेंडर प्रक्रिया हो गई और इन दोनों में से कम दर वाली फर्म से सामग्री खरीद नहीं करने पर वसूली का डर सताने लगा। इसकी वजह से सरपंचों ने सामग्री की खरीद ही नहीं कर पाई। टीएफसी व एसएफसी समेत अन्य योजनाओं में ग्राम पंचायत अपने स्तर पर काम करवाती है लेकिन पहले टेंडर का रोड़ा और बाद में टीएफसी की किश्त का उपयोग केवल हैंडपंप व बोरिंग करवाने में ही करने के लिए पाबंद करने के कारण वे अन्य कोई काम नहीं करवा पाए।

इसमें भी पीसांगन पंचायत समिति समेत कुछ अन्य स्थानों को डार्कजोन घोषित कर दिया गया। महानरेगा में भी केवल आईटी सेंटर के ही पक्के काम स्वीकृत किए गए। जिले में पिछले साल मार्च माह में 256 ग्राम पंचायतों में दस-दस लाख की लागत से आईटी सेंटर के काम स्वीकृत किए गए लेकिन दस माह बीत जाने के बावजूद टेंडरों के घालमेल में वह आधे-अधूरे ही पड़े हैं। अब ग्राम पंचायतों द्वारा किए गए टेंडर कब से अमल में आ पाएंगे, यह भी तय नहीं है। इन टेंडरों के लिए सरकार ने सरपंच व ग्रामसेवक पर विश्वास ना कर पूरी कमेटी बनाते हुए जेईएन व एकाउंटेंट को भी शामिल किया गया।

महानरेगा में गड़बड़ी के चलते मालातों की बेर के सरपंच गणपतसिंह व बोराड़ा के सरपंच रामसिंह चौधरी को जेल की हवा खानी पड़ी, वहीं जवाजा पंचायत समितियों में सरपंचों के नाम रिकवरी निकाली गई। गड़बड़ी के कारण ही महानरेगा में सरपंचों से मेट लगाने और श्रमिकों के नाम लिखने का अधिकार भी ग्राम पंचायतों से छीनकर पंचायत समिति स्तर पर दे दिया गया। यही वजह रही कि सरपंच अपने विश्वासपात्र को मेट तक नहीं बना पाए और विरोधी उन पर हावी रहे।

सरपंचों का एक साल यूं ही बरबाद हो गया। क्षेत्र का विकास नहीं कर पाए। पूरे साल टेंडरों को लेकर ही माथापच्ची करते रहे। अभी भी पंचायतों ने टेंडर कर लिए लेकिन वह अमल में नहीं आ पाए। पुराने टेंडर भी निरस्त नहीं हो पाए। - भूपेंद्र सिंह राठौड़, जिलाध्यक्ष सरपंच संघ

पंचायत क्षेत्र में कोई विकास नहीं करवा पाए। यहां तक की नालियों का निर्माण तक नहीं करा पाए। विकास नहीं होने से जनता सरपंचों को कोस रही है। आईटी सेंटर दिए तो राशि दी सिर्फ 4 लाख। अब कह रहे हैं पहले इसका हिसाब तो दो आगे की राशि देंगे, ऐसे में विकास तो ठप होगा ही, जाहिर है काम भी रुकेगा। - श्रीकिशन गुर्जर, सरपंच, न्यारा


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Monday, January 17, 2011

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